Saṃskṛtam through the Gita

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विभक्तयः

द्वितीयाएकवचनम्

In the Gītā77 ślokas · 189 padas

किम्

आचार्यम् पाण्डवानीकम् वचनम् व्यूढम्

एताम् चमूम् महतीम् व्यूढाम्

संज्ञार्थम्

भीष्मम्

शङ्खम् सिंहनादम् हर्षम्

देवदत्तम् पाञ्चजन्यम् पौण्ड्रम् महाशङ्खम्

अनन्तविजयम्

नभः पृथिवीम्

धनुः

इदम् रथम् वाक्यम् हृषीकेशम्

रथोत्तमम्

इदम् इमम् युयुत्सुम् समुपस्थितम् स्वजनम्

श्रेयः स्वजनम्

राज्यम् विजयम्

स्वजनम्

कुलक्षयकृतम् दोषम् पातकम्

कुलक्षयकृतम् दोषम्

कुलम् कृत्स्नम्

पापम् महत् स्वजनम्

अप्रतीकारम् अशस्त्रम् माम्

चापम् सशरम्

तत् माम्

एकम् तत् बुद्धिम् श्रेयः

नैष्कर्म्यम् सिद्धिम्

कर्म क्षणम्

कर्मयोगम्

कर्म नियतम्

कर्म तदर्थम्

परम् श्रेयः

अघम्

अक्षरसमुद्भवम् कर्म ब्रह्म ब्रह्मोद्भवम्

चक्रम् प्रवर्तितम् मोघम्

कर्म कार्यम् परम्

लोकसङ्ग्रहम् संसिद्धिम्

तत् प्रमाणम् यत्

वर्त्म

कर्म

लोकसङ्ग्रहम्

बुद्धिभेदम्

इदम् मतम्

एतत् मतम्

किम् प्रकृतिम् सदृशम्

वशम्

पापम्

एनम् वैरिणम्

ज्ञानम् देहिनम्

एनम् ज्ञानविज्ञाननाशनम् पाप्मानम्

आत्मानम् कामरूपम् दुरासदम् परम् शत्रुम्

तत् माम् योगम् समग्रम्

अक्षरम् अव्यक्तम् त्वाम्

मनः माम्

अक्षरम् अचलम् अचिन्त्यम् अनिर्देश्यम् अव्यक्तम् कूटस्थम् ध्रुवम् सर्वत्रगम्

इन्द्रियग्रामम् माम्

दुःखम्

माम्

बुद्धिम् मनः

चित्तम् माम् स्थिरम्

मदर्थम् सिद्धिम्

एतत् मद्योगम् सर्वकर्मफलत्यागम्

इदम् उक्तम् धर्म्यामृतम्

अधःशाखम् अव्ययम् अश्वत्थम् ऊर्ध्वमूलम् तम्

अश्वत्थम् एनम् सुविरूढमूलम्

आद्यम् तत् तम् पदम् परिमार्गितव्यम् पुरुषम्

अव्ययम् तत् पदम्

तत् यत्

शरीरम्

घ्राणम् चक्षुः मनः रसनम् श्रोत्रम् स्पर्शनम्

उत्क्रामन्तम् गुणान्वितम् भुञ्जानम् स्थितम्

अवस्थितम् एनम्

अखिलम् जगत् तत् मामकम्

गाम्

अन्नम् चतुर्विधम् देहम्

लोकत्रयम्

क्षरम्

पुरुषोत्तमम् माम्

एतत्